वनवास में पांडव क्या खाते-पकाते थे.

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वनवास में पांडव क्या खाते-पकाते थे.

यह आर्टिकल न्यूज़ 18 हिंदी से साभार सौजन्य सह प्रस्तुत कर रहा हूं.

क्या आपको मालूम है कि पांडवों को कैसा भोजन पसंद था…? वो नान वेजेटेरियन थे या वेजेटेरियन यानि कि मांसाहारी या शाकाहारी. शोध कहती हैं कि महाभारत दौर में लोग दोनों तरह का खाना खाते थे. जमकर दूध पीते थे. पांडव क्या खाते-पीते थे. उन्हें कौन से व्यंजन पसंद थे. खासकर तब जबकि वो निर्वासन में वनवास में रहने गए. मांसाहार को राजा युधिष्ठर अपरिहार्य स्थितियों में उचित मानते थे.

पांडवो का वनवास में पसंदीदा खाना :

पांडव पूरी तरह से शाकाहारी नहीं थे. उन्होंने निर्वासन के दौरान मांसाहारी भोजन किया और शाकाहाऱी खाना भी. ऐतिहासिक ग्रंथों से पता चलता है कि वे वनवास के दौरान हिरण सह और अन्य जानवरों का शिकार करते थे, जो उस दौर में क्षत्रियों के बीच आमबात थी. निर्वासन के दौरान उनके खाने में विविधता और बढ़ी. वो इस दौरान जिन क्षेत्रों से गुजरे, जहां रुके, वहां का खाना खाने लगे.

वनपर्व में कई जगह संकेत मिलता है कि भीम वनवास के दौरान जंगल से हिरण और जंगली पशुओं को पकड़ते थे. वनपर्व के अध्याय 11–12 में भीम के वन में दौड़ते हुए हिरण को पकड़ने, उछालने और लाने का उल्लेख है. वहीं शांति पर्व में युधिष्ठिर खुद कहते हैं, कि वनवास में शिकार और मांस खाना धर्म-विरोधी नहीं है.

अनुशासन पर्व में भी युधिष्ठिर कहते हैं, मुश्किल परिस्थिति में मांस खाओ. जीवन रक्षा के लिए मांस ग्रहण करना उचित है. कई जगह लिखा है कि पांडव नदीतट पर रहते वक्त जाल से मछली पकड़ते थे.

वनपर्व में एक पूरा अध्याय “मांसाहार” पर है, जिसमें ऋषि अगस्त्य द्वारा मांस खाने के कारणों के बारे में बताया गया है. जिसमें ये साफ होता है कि मांस उस काल में आम और स्वीकार्य था.

मुर्गी और मछली खाते थे :

महाभारत में उनके आहार के हिस्से के रूप में मुर्गी और मछली सहित विभिन्न मांसाहारी व्यंजनों का उल्लेख है. प्राचीन भारत में मिश्रित भोजन होता था यानि शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के. अनुष्ठानों और खास कार्यक्रमों में मांसाहारी खाना पकता था.

हिरण भी शिकार करके खाया :

पांडवों का भोजन मिश्रित था, जिसमें शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरहके खाद्य पदार्थ शामिल थे. वनवास में वो फलों, जड़ों से जुड़े खाद्य पदार्थ और अनाज भी खाते थे. ऐतिहासिक ग्रंथों से पता चलता है कि वे शिकार भी करते थे. मांस भी खाते थे. वनवास के दिनों में उन्होंने मुख्य रूप से हिरण का मांस खाया और मछलियां सेवन की.

शिकार से काफी आहार जुटाते थे :

हिरण के अलावा ये भी संभावना है कि उन्होंने अन्य खेल जानवरों और शायद मुर्गी का सेवन किया. महाभारत में उल्लेख है कि पांडव कुशल शिकारी थे, जिसने उन्हें जंगल में रहने के दौरान शिकार से भोजन के लिए काफी आहार जुटाया.

अक्षयपात्र भी देता था मनचाहे खाने महाभारत में बताया गया है कि युधिष्ठिर को सूर्य देव ने एक अक्षय पात्र भेंट किया था, जो मांस सहित मनचाहे और भरपूर भोजन देता था. ( समाप्त )

साभार : न्यूज़ 18. हिंदी.

फुल क्रेडिट : लेखक संजय श्रीवास्तव.

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