रिज़र्व बैंक कितनी नोट छाप सकता है?

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किसी भी देश की करेंसी की कीमत अर्थव्यवस्था के बेसिक सिद्धांत, डिमांड और सप्लाई पर आधारित होती है. फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में जिस करेंसी की डिमांड ज्यादा होगी उसकी कीमत भी ज्यादा होगी, जिस करेंसीकी डिमांड कम होगी उसकी कीमत भी कम होगी. यह पूरी तरह से ऑटोमेटेड है. सरकारें करेंसी के रेट को सीधे प्रभावित नहीं कर सकती हैं.

डॉलर दुनिया की सबसे बड़ी करेंसी है. दुनियाभर में सबसे ज्यादा कारोबार डॉलर में ही किया जाता है. हम जो सामान विदेश से मंगवाते हैं उसके बदले हमें रुपये नहीं बल्कि डॉलर देना पड़ता है. और जब हम कोई सामान बेचते हैं तो हमें डॉलर मिलता है.

आसान भाषा में कहें तो फॉरेन एक्सचेंज एक अंतरराष्ट्रीय बाजार है जहां दुनियाभर की मुद्राएं खरीदी और बेची जाती हैं. यह बाजार डिसेंट्रलाइज्ड होता है. यहां एक निश्चित रेट पर एक करेंसी के बदले दूसरी करेंसी खरीदी या बेची जाती है. दोनों करेंसी जिस भाव पर खरीदी-बेची जाती है उसे एक्सचेंज रेट कहते हैं. यह एक्सचेंज रेट मांग और आपूर्ति के सिंद्धांत के हिसाब से घटता बढ़ता रहा है.

भारत में करेंसी छापने के नियम भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा नियंत्रित होते हैं, जो न्यूनतम रिजर्व प्रणाली के तहत काम करता है. इसके अनुसार, RBI को करेंसी नोट छापने के लिए कम से कम ₹200 करोड़ का रिजर्व (सोना और विदेशी मुद्रा के रूप में रखना अनिवार्य है. यह निर्णय सकल घरेलू उत्पाद (GDP), विकास दर, और राजकोषीय घाटे जैसे कारकों पर आधारित होता है, ताकि अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनी रहे.

एक रुपए के नोट को छोड़कर, सभी नोट छापने का अधिकार RBI के पास है, जबकि रुपये 1 का नोट भारत सरकार छापती है. रुपये 10,000 से बड़े मूल्य के नोट छापने सरकार की अनुमति लेनी होती है. अंतिम निर्णय सरकार द्वारा लिया जाता है.

यदि आवश्यकता से अधिक नोट छापे जाते हैं, तो महंगाई बढ़ सकती है, जिससे करेंसी का मूल्य गिरता है. इसलिए, नोटों की छपाई को नियंत्रित किया जाता है ताकि बाजार में पैसे और सामान का संतुलन बना रहे. नोटों को उच्च सुरक्षा मानकों के साथ छापा जाता है. नोटों को छापने के लिए विशेष कागज और स्याही का उपयोग किया जाता है. देशमें नोट छापने का अधिकार सिर्फ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई के पास है. अब सवाल ये है कि क्या आरबीआई सरकार के कहने पर अपने मुताबिक जितना मर्जी उतना नोट छाप सकती है? सवाल ये है कि आखिर नोट छापने को लेकर नियम क्या है.

सबसे पहले ये जानते हैं कि आरबीआई नोट कैसे छापता है? इसको लेकर अर्थशास्त्री बताते हैं कि कोई भी देश अपनी मर्जी से नोट नहीं छाप सकता है. दरअसल नोट छापने को लेकर नियम बने हुए हैं. बता दें कि अगर कोई देश बहुत ज्यादा पैसा छापता है, तो सबके पास नोट आ जाएंगे और इससे महंगाई सातवें आसमान पर पहुंच जाएगी.

नोटों की छपाई को लेकर नियम

बता दें कि किसी भी देश में कितने नोट छपने हैं, यह उस देश की सरकार, सेंट्रल बैंक, जीडीपी, राजकोषीय घाटा और विकास दर के हिसाब से तय किया जाता है. जैसे भारत में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया तय करती है कि कब और कितने नोट छापने हैं.

RBI द्वारा नोटों की छपाई मिनिमम रिजर्व सिस्टम के आधार पर तय की जाती है. यह प्रणाली भारत में 1957 से लागू है. इसके मुताबिक आरबीआई को यह अधिकार है कि वह आरबीआई फंड में कम से कम 200 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति अपने पास हर समय रखे. इतनी संपत्ति रखने के बाद RBI सरकार की सहमति से जरूरत के हिसाब से नोट छाप सकती है.

नियम के अनुसार आरबीआई के रिजर्व में कम से कम रु 200 करोड़ होने चाहिए , जिसमें 115 करोड़ का सोना और 85 करोड़ के विदेशी मुद्रा भंडार होने चाहिए.

उल्लेखनीय हैं कि भारत में नोटों की छपाई चार प्रेस में होती है. महाराष्ट्र के नासिक और मध्य प्रदेश के देवास प्रेस में नोट छापे जाते हैं. बता दें कि सुरक्षा प्रिंटिंग और मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की देखरेख में यहां नोट छापा जाता है. भारत में इसके अलावा दो अन्य प्रेस कर्नाटक के मैसूर में और पश्चिम बंगाल के सल्बोनी में स्थित है.

नकली नोट छापने पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 489A और 489B के तहत गंभीर अपराध माना जाता है, जिसके लिए आजीवन कारावास या 10 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है. इसके अलावा, नकली नोट बनाने या बेचने के उपकरण रखने पर धारा 489D और नकली नोटों को चलाने के प्रयास पर धारा 489C के तहत भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है. ( समाप्त )

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