अखंड पत्थर को काटकर बनाया गया एलोरा का अद्भुत कैलाश शिव मंदिर.

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कैलाश मंदिर एलोरा, महाराष्ट्र में स्थित एक अद्भुत, 8वीं सदी का, चट्टान को काटकर बनाया गया शिव मंदिर है, जिसे राष्ट्रकूट के राजा कृष्ण प्रथम ने बनवाया था और यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है. यह दुनिया की सबसे बड़ी single-rock संरचनाओं में से एक है, जो ऊपर से लेकर नीचे की ओर तराशा गया है और अपनी जटिल नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है, जो हमारे रामायण और महाभारत के दृश्यों को दर्शाती है.

यह मंदिर का निर्माण एक ही विशाल बेसाल्ट चट्टान से ऊपर से नीचे की ओर तराश कर बनाया गया है, जो इसे वास्तुकला का एक चमत्कार माना जाता है. यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और शिव के निवास स्थान कैलाश पर्वत का प्रतिनिधित्व करता है.

8वीं शताब्दी में राष्ट्रकूट शासक कृष्ण प्रथम द्वारा बनाया गया है. एलोरा गुफाओं (गुफा संख्या 16) में स्थित है, जो औरंगाबाद (छत्रपति संभाजी नगर) के पास है. द्रविड़ियन और दक्षिण भारतीय शैली का मिश्रण, जिसमें दो मंजिला गोपुरम, मंडप और नंदी की मूर्ति है. एलोरा गुफाओं का हिस्सा होने के कारण, यह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है.

यह मंदिर प्राचीन भारत के उन्नत इंजीनियरिंग कौशल, कला और धार्मिक समर्पण का एक शानदार उदाहरण है, जो आज भी दुनिया भर के पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों को आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

यह दुनिया की सबसे बड़ी एकल चट्टान से निर्मित संरचनाओं में से एक है, जिसे 4 लाख टन चट्टान हटाकर बनाया गया है. इसे ऊपरसे नीचेकी ओर खोदा गया था, जिसमें हजारों मजदूरों ने लगभग 150 वर्षों तक काम किया. इसमें द्रविड़ और चालुक्य शैलियों का मिश्रण है यह औरंगाबाद से लगभग 30 किमी की दूरी पर है.

औरंगजेब ने इसे तोड़ने की कोशिश की थी, जिसके निशान आज भी दिखते हैं, लेकिन इसकी मजबूती के कारण यह बच गया है.

एक प्रचलित मान्यता यह है कि कैलाश मंदिर पर मूल रूप से सफेद प्लास्टर की एक मोटी परत चढ़ी हुई थी, जिससे यह पवित्र कैलाश पर्वत जैसा दिखता था, इसीलिए इसका नाम कैलाश पड़ा. विद्वानों का यह भी दावा है कि वास्तव में पूरे मंदिर को रंगा और प्लास्टर किया गया था, इसीलिए इसे रंग महल के नाम से भी जाना जाता था.

कैलाश मंदिर कितना पुराना है ? यह मंदिर लगभग 8वीं शताब्दी ईस्वी में बनाया था, जिससे आज यह करीब 1200 वर्ष से अधिक पुराना हो गया है.

वहां तक कैसे पहुचे :

एलोरा का शिव मंदिर (कैलाश मंदिर) पहुँचने के लिए, पहले औरंगाबाद जाएँ, जो कि नजदीकी शहर है.

फिर औरंगाबाद से बस, टैक्सी या ऑटो लेकर एलोरा गुफाओं तक पहुँचें, जहाँ कैलाश मंदिर (गुफा संख्या 16) स्थित है, क्योंकि यह मंदिर गुफा परिसर के अंदर ही है और यहाँ पहुँचने के लिए आपको पैदल या स्थानीय ट्रांसपोर्ट का सहारा लेना होगा, क्योंकि यह मुख्य प्रवेश द्वार से कुछ दूरी पर है.

औरंगाबाद कैसे पहुँचें (मुख्य शहर) :

हवाई मार्ग :

औरंगाबाद हवाई अड्डा (IXU) निकटतम है, जहाँ से मुंबई, दिल्ली जैसे शहरों से फ्लाइट्स मिलती हैं.

रेल मार्ग :

औरंगाबाद रेलवे स्टेशन, एलोरा के सबसे करीब है और यह देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा है.

सड़क मार्ग :

महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) की बसें और निजी बसें औरंगाबाद से चलती हैं, और आप टैक्सी या निजी गाड़ी से आ सकते हैं.

औरंगाबाद से एलोरा गुफाएँ तक :

बस :

औरंगाबाद के सेंट्रल बस स्टैंड (CBS) या CIDCO बस स्टैंड से एलोरा के लिए नियमित बसें (MSRTC और निजी) चलती हैं, जो आपको गुफाओं के प्रवेश द्वार के पास छोड़ देंगी.

टैक्सी/कैब :

यह सबसे सुविधाजनक तरीका है. आप औरंगाबाद से एक टैक्सी किराए पर ले सकते हैं, जो आपको लगभग एक घंटे में गुफाओं तक पहुँचा देगी (लगभग 30 किमी).

ऑटो-रिक्शा :

औरंगाबाद में ऑटो-रिक्शा भी उपलब्ध हैं, लेकिन वापसी के लिए इन्हें बुक करना मुश्किल हो सकता है.

एलोरा गुफाओं के अंदर (कैलाश मंदिर तक) :

कैलाश मंदिर (गुफा संख्या 16) एलोरा गुफा परिसर का हिस्सा है. यह मुख्य प्रवेश द्वार से लगभग 2 किमी दूर है, इसलिए आपको टिकट लेकर अंदर जाना होगा और वहाँ से मंदिर तक पैदल चलना होगा या स्थानीय शटल सेवा का उपयोग करना होगा, जो आमतौर पर उपलब्ध होती है.

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