सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में आमतौर पर ( Ordinary Portland Cement ) OPC 53 ग्रेड या PSC (Portland Slag Cement) का उपयोग किया जाता है. ये सीमेंट पुलों को उच्च मजबूती जल्दी सेट होने की क्षमता और स्थायित्व प्रदान करते हैं.
बुलेट ट्रेन और सरकारी पुलों में इस्तेमाल सीमेंट की प्रमुख विशेषता मे.
OPC 53 ग्रेड (Ordinary Portland सीमेंट ) का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है क्योंकि यह भारी भार सहने की क्षमता रखता है और निर्माण को जल्दी सेट करता है.
PSC (Portland Slag Cement) यह टिकाऊपन और खास रासायनिक प्रतिरोध के लिए उपयोग किया जाता है. विशेष कंक्रीट (RCC): बुलेट ट्रेन के अलाइनमेंट में, कंक्रीट संरचनाओं को मजबूत करने के लिए स्टील के साथ प्रबलित सीमेंट कंक्रीट (RCC) का उपयोग किया जाता है. इन योजनाओं में उच्च ग्रेड कंक्रीट का उपयोग किया जाता है.
ओपीसी (Ordinary Portland Cement) सीमेंट के मुख्य रूप से 3 ग्रेड होते हैं, 33, 43, और 53 ग्रेड, जो 28 दिनों के बाद सीमेंट की स्ट्रेंथ को दर्शाते हैं. यह ग्रेड घर निर्माण के लिए 43, और ऊँची इमारतों या भारी निर्माण के लिए 53 ग्रेड का उपयोग होता है.
*** 33 ग्रेड (Grade 33) :
यह सबसे कम स्ट्रेंथ वाला सीमेंट है, जिसे आम तौर पर प्लास्टरिंग, और कम भार वाले कार्यों (जैसे- छोटे घर, टाइल्स) के लिए इस्तेमाल करते है.
*** 43 ग्रेड (Grade 43) :
यह सबसे लोकप्रिय है और इसे सामान्य निवासी निर्माण, स्लैब, बीम और कॉलम के लिए उपयोग किया जाता है. यह स्ट्रेंथ और फ्लेक्सिबिलिटी का संतुलन प्रदान करता है.
*** 53 ग्रेड (Grade 53) :
यह उच्च-शक्ति वाला सीमेंट है, जो कम समय में मजबूती प्रदान करता है.इसका उपयोग बड़ी परियोजनाओं, पुलों, ऊँची इमारतों और भारी लोड वाली कंक्रीट संरचनाओं (RCC) में किया जाता है.
53 ग्रेड का उपयोग प्लास्टरिंग या साधारण ईंट की चिनाई के लिए नहीं किया जाता है क्योंकि इसमें क्रैक (दरार) आने की संभावना ज्यादा होती है. इसके अलावा PPC (Portland Pozzolana Cement) भी एक अन्य सामान्य प्रकार है, जो अधिक टिकाऊ माना जाता है.
संक्षेप में, 43 और 53 ग्रेड के सीमेंट में मुख्य अंतर उनकी संपीडन शक्ति और उपयोगों में निहित है. 53 ग्रेड का सीमेंट जल्दी मजबूती प्रदान करता है और उच्च तनाव वाली संरचनाओं के लिए उपयुक्त है, जबकि 43 ग्रेड का सीमेंट लचीलापन प्रदान करता है और सामान्य निर्माण कार्यों के लिए आदर्श माना जाता है.
भारत में सीमेंट उद्योग का एक विशाल नेटवर्क है, जिसमें 210 से अधिक बड़े सीमेंट संयंत्र और लगभग 350 से अधिक छोटे (सूक्ष्म) सीमेंट संयंत्र मौजूद हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 410 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक है. इनमें लगभग 50-60 प्रमुख बड़ी और मध्यम कंपनियां देश के कुल उत्पादन का 95% से अधिक हिस्सा होता हैं.
भारत में प्रमुख 10 सीमेंट कंपनियां :
(1) अल्ट्राटेक सीमेंट (सबसे बड़ी)
(2) अंबुजा सीमेंट और एसीसी (ACC)
(अडानी ग्रुप)
(3) श्री सीमेंट.
(4) डालमिया भारत.
(5) जेके सीमेंट.
(6) बिड़ला कॉर्पोरेशन.
(7) रामको सीमेंट.
(8) जेके लक्ष्मी सीमेंट.
(9) स्टार सीमेंट.
(10) हीडलबर्ग सीमेंट.
सीमेंट उद्योग से जुड़ी मुख्य बातें :
* उत्पादन :
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक देश है.
* क्षेत्र :
अधिकांश बड़े संयंत्र राजस्थान, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में स्थित हैं.
* विकास :
वित्त वर्ष 2027 तक 130 मिलियन टन की अतिरिक्त क्षमता बढ़ाने की योजना है.
अल्ट्राटेक सीमेंट 21.40% बाजार हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर है, जबकि अन्य प्रमुख खिलाड़ी (अंबुजा, एसीसी, श्री, डालमिया) मिलकर बाजार में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं.
सीमेंट का निर्माण चूना पत्थर (लाइमस्टोन), मिट्टी, शेल, आयरन ओर और फ्लाई ऐश जैसे कच्चे माल को मिलाकर किया जाता है. इन सामग्रियों को पीसकर, 1450°C से अधिक तापमान पर रोटरी भट्टी में गर्म किया जाता है, जिससे ‘क्लिंकर’ (कठोर गोल पिंड) बनता है. अंत में, क्लिंकर को ठंडा करके जिप्सम के साथ बारीक पीसा जाता है, जिससे सीमेंट तैयार होता है.
भंडारण और पैकेजिंग :
तैयार सीमेंट को साइलो में संग्रहीत करके बोरियों में पैक किया जाता है.
मुख्य सामग्री :
*** चूना पत्थर (लाइमस्टोन) :
कैल्शियम का मुख्य स्रोत.
*** मिट्टी (Clay/Shale) :
सिलिका, एल्युमिना और आयरन का स्रोत.
*** जिप्सम :
सीमेंट को जल्दी जमने से रोकने के लिए.
भारत में सीमेंट उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र राजस्थान है, उसके बाद आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश का स्थान आता है, जहाँ बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है. प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में राजस्थान (चित्तौड़गढ़, सवाई माधोपुर), मध्य प्रदेश (सतना, कटनी), आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, और तमिलनाडु शामिल हैं.
भारत में प्रमुख सीमेंट उत्पादक
राज्य और उनके स्थान :
(1) राजस्थान :
चित्तौड़गढ़, सवाई माधोपुर, सीकर, ब्यावर (श्री सीमेंट).
(2) मध्य प्रदेश :
कटनी, सतना, नीमच, मैहर.
(3) आंध्र प्रदेश और तेलंगाना :
अदिलाबाद, तंदूर, कृष्णा (अल्ट्राटेक, एसीसी, इंडिया सीमेंट्स).
(4) गुजरात :
जामनगर, द्वारका, पोरबंदर.
(5) छत्तीसगढ़ :
अकलतरा, दुर्ग.
(6) महाराष्ट्र :
बटिबोरी, मुकुटबन, मुंबई (अल्ट्राटेक, एसीसी).
(7) दक्षिण भारत :
तमिलनाडु (थलयुथु) और कर्नाटक (बेंगलुरु, गुलबर्गा).
प्रमुख सीमेंट कंपनियाँ :
(1) अल्ट्राटेक सीमेंट (Aditya Birla Group) : मुंबई मुख्यालय, पूरे देश में 23 से अधिक एकीकृत संयंत्र.
(2) एसीसी लिमिटेड और अंबुजा सीमेंट (Adani Group) : प्रमुख निजी उत्पादक.
(3) श्री सीमेंट : राजस्थान (ब्यावर) में मुख्यालय.
(4) डालमिया सीमेंट : भारत में अग्रणी निर्माण सामग्री निर्माता.
(5) बिड़ला कॉर्पोरेशन लिमिटेड :
सतना, चंदेरिया, दुर्गपुर में संयंत्र.
(6) सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) : सरकारी कंपनी जो बोकाजन, अदिलाबाद, नयागाँव में संयंत्र संचालित करती है.
कुल 210 से अधिक बड़े सीमेंट संयंत्रों के साथ, भारत का 32% उत्पादन दक्षिण भारत में और 20% उत्तर भारत में होता है.
एसीसी लिमिटेड एसीसी लिमिटेड, जिसे पहले एसोसिएटेड सीमेंट कंपनीज लिमिटेड के नाम से जाना जाता था, भारत के सबसे पुराने सीमेंट निर्माता ब्रांडों मेंसे एक है. इसकी स्थापना 1936 में हुई थी और अब तक इसकी उत्पादन क्षमता लगभग 33 मीट्रिक टन प्रति वर्ष है.
विदेशी कंपनी की बात करें तो
लाफार्ज एक फ्रांसीसी औद्योगिक कंपनी है जो सीमेंट, निर्माण सामग्री और कंक्रीट में विशेषज्ञता रखती है. यह दुनिया की सबसे बड़ी सीमेंट निर्माता कंपनी है. इसकी स्थापना 1833 में जोसेफ-ऑगस्टे पाविन डी लाफार्ज द्वारा की गई थी और यह होल्सिम समूह का हिस्सा है. ***91
आधुनिक सीमेंट (पोर्टलैंड सीमेंट) की खोज 1824 में ब्रिटिश राजमिस्त्री और आविष्कारक जोसेफ एस्पडिन (Joseph Aspdin) ने की थी. उन्होंने इंग्लैंड में चूना पत्थर और मिट्टी को गर्म करके एक मजबूत पाउडर विकसित किया, जिसे उन्होंने पोर्टलैंड सीमेंट नाम दिया क्योंकि यह इंग्लैंड के पोर्टलैंड की चट्टानों जैसा दिखता था.
इससे पहले 1796 में जेम्स पार्कर ने ‘रोमन सीमेंट’ का पेटेंट कराया था, लेकिन एस्पडिन का सीमेंट आधुनिक रूप में अधिक प्रचलित हुआ. प्राचीन रोमन लोग भी ज्वालामुखी राख और चूने का उपयोग कर कंक्रीट (जो एक प्रकार का प्रारंभिक सीमेंट मिश्रण था) बनाते थे, लेकिन आधुनिक पोर्टलैंड सीमेंटका आविष्कार 1824 में हुआ था
सीमेंट के आविष्कार (19वीं सदी) से पहले, प्राचीन काल में निर्माण के लिए मुख्य रूप से चूना , मिट्टी, जिप्सम, और ज्वालामुखी राख (Pozzolana) का उपयोग किया जाता था. इन सामग्रियों को मजबूती देने के लिए गुड़, चीनी, दालें, राल और गोंद जैसे प्राकृतिक पदार्थों को मिलाकर एक बेहद टिकाऊ पेस्ट तैयार किया जाता था.
प्रमुख ऐतिहासिक सामग्री :
चूने का गारा : प्राचीन मिस्र, ग्रीक और रोमन सभ्यताओं में चूना पत्थर को जलाकर चूना बनाया जाता था.
रोमन कंक्रीट (Pozzolana) : रोमन लोग चूने में ज्वालामुखी की राख मिलाकर एक ऐसा मिश्रण बनाते थे जो पानी के नीचे भी जम सकता था.
मिट्टी और भूसा : प्राचीन समय में ईंटों को जोड़ने के लिए मिट्टी और भूसे का इस्तेमाल किया जाता था.
चिपचिपा चावल (Sticky Rice) :
चीन में चूने के साथ चिपचिपे चावल का इस्तेमाल कर बेहद मजबूत इमारतें बनाई गई थीं.
ताजमहल का निर्माण :
इसमें चूना, सरूज, गुड़, चीनी, गोंद और राल आदि के विशेष मिश्रण का उपयोग किया गया था.
ये मिश्रण आज के सीमेंट से कम नहीं थे, जिसके कारण ताजमहल, कोलोसियम और पुराने किले आज भी मजबूती से खड़े हैं.
( समाप्त )
